स्थापना - सन 2001 रजि.न. 22/2013.14

झारखण्ड महाब्राह्मण संघ

संगठन के पूरे 25 वर्षों का साथ

संघ के संविधान एवं नियमावली

संघ का नाम: झारखण्ड महाब्राह्मण संघ
संघ का मुख्यालय: वर्तमान अस्थायी पता –
श्री अजय बिहारी तिवारी,
प्रधान रोड, राँची (झारखण्ड प्रदेश)
डाक संख्या: 201702 

सदस्यता: सम्पूर्ण झारखण्ड प्रदेश में रहने वाले महाब्राह्मण वर्ग के सदस्य होंगे।

संघ का उद्देश्य:
महाब्राह्मण समाज के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, धार्मिक, पारिवारिक, सांस्कृतिक उन्नति हेतु कार्य करना।

दिनांक 08.04.2001 को झारखण्ड प्रदेश स्तर पर महासम्मेलन संघ का एक दिवसीय सम्मेलन हजारीबाग शहर के सेन्ट्रल बैंक नियालया चौक, चौपारण रोड, हजारीबाग में दिन के 9 बजे से प्रारंभ हुई। इस सम्मेलन की अध्यक्षता श्री बालमुकुन्द शास्त्री जी पादलात गिरिडीह किए।

सर्वप्रथम सभा अध्यक्ष बालमुकुन्द शास्त्री जी को द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया। तत्पश्चात श्री चितरंजन मिश्रा रांची एवं श्री धनुषधारी पाण्डेय जी कोकबरसांइ, हजारीबाग के द्वारा भगवात विष्णु के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।

श्री हरिकिशुन पाण्डेय के द्वारा अध्यक्ष को माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। तत्पश्चात सभा में एक मिनट का मौन धारण कर श्रद्धेय स्व. गुनाकर दीक्षित के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस महासम्मेलन में प्रदेश के अन्तर्गत विभिन्न जिलों से लगभग 500 स्वजातीय बन्धु उपस्थित थे। जिसे महासम्मेलन अध्यक्ष श्री हरिकिशुन पाण्डेय के द्वारा स्वागत किया गया। तत्पश्चात डॉ. श्याम पाण्डेय, जमशेदपुर, रामेश्वर पाण्डेय कल्लन, हजारीबाग, श्री राजेन्द्र तिवारी पटना, श्री पुरुषोत्तम तिवारी चांदवा, श्री कृष्णा शरण पाण्डेय लोहसिंघना, श्री सुधामन तिवारी गिरिडीह, श्री शिवकुमार पाण्डेय गुमला, श्री राज “धामदा पाण्डेय” द्वारा प्रासंगिक विचार कोटिबद्ध की। अध्यक्ष किशोर तिवारी पटना, श्री सीताराम तिवारी रांची, श्री पाण्डेय हजारीबाग, मदन कुमार तिवारी चांदवा, श्री आर. के. मिश्रा रांची, श्री बृजमोहन तिवारी गिरिडीह, ग्राम प्रदेश स्तर हजारीबाग, श्री चितरंजन मिश्रा रांची के द्वारा विचार व्यक्त किया गया। विचाराधीन प्रस्तावों में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया गया।

पारित प्रस्ताव

उपरोक्त प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई एवं कुछ संशोधन के साथ पूरी सभा प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया।

श्री रामस्वारथ पाण्डेय प्रवेश गाँव में गरीब परिवार के बच्चों को निःशुल्क पट्टों की व्यवस्था हो। उसी गाँव के शिक्षित युवाछात्रों के सहयोग से बच्चों को शिक्षित किया जाय। विशेषतः जो बच्चे विद्यालय के बाद जीवन यापन को अर्थव्यवस्था हेतु शिक्षा छोड़ देते हैं। विशेषतः लड़कों को छोटे से बड़े हर स्तर पर आवश्यक व्यवस्था होनी चाहिए। संचालन में सुभाषचन्द्र टंडन ने संगठन बनाये के उद्देश्य से अलग तीन वर्गों के लिए प्रांतीय कार्यसमिति का गठन किया गया, जिसके लिए निम्नलिखित प्रतिनिधियों का चयन किया गया।

शारीरिक और राजनीतिक आदि क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास करता है।

संघ का कार्यक्षेत्र

सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य इस संघ का कार्यक्षेत्र होगा।

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